War का असर: दुबई-अबूधाबी से भारतWar का असर: दुबई-अबूधाबी से भारत

War का असर: दुबई-अबूधाबी से भारत की फ्लाइट का किराया 75 हजार से 1.18 लाख तक

Source – https://dainik.bhaskar.com/mYbXw5Lbo1b

नई दिल्ली | इंटरनेशनल डेस्क

मध्य-पूर्व हिस्सों में बढ़ते तनाव और युद्ध जैसे हालात का असर अब अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा पर भी दिखाई देने लगा है। दुबई और अबूधाबी से भारत आने वाली फ्लाइट्स के किराए में अचानक भारी बढ़ोतरी हो गई है। कई रूट्स पर टिकट की कीमत 75 हजार रुपए से लेकर 1.18 लाख रुपए तक पहुंच गई है।

क्या है वजह  दरअसल, क्षेत्र में जारी तनाव के कारण कई एयरलाइंस को अपने फ्लाइट रूट बदलने पड़े हैं। कुछ देशों के हवाई क्षेत्र से उड़ान भरने पर रोक या सुरक्षा खतरे की वजह से फ्लाइट्स को लंबा रास्ता लेना पड़ रहा है। इसका सीधा असर टिकट की कीमतों पर पड़ा है।

War का असर: दुबई-अबूधाबी से भारत
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अचानक बढ़ी यात्रियों की मांग

एयरलाइन इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, युद्ध जैसी स्थिति बनने के बाद बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थानों की ओर लौटने की कोशिश कर रहे हैं। खासतौर पर भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल के प्रवासी कामगार जल्दी से जल्दी अपने घर लौटना चाहते हैं।

इस वजह से दुबई और अबूधाबी से भारत आने वाली फ्लाइट्स में यात्रियों की मांग अचानक बढ़ गई है। सीमित सीटों और ज्यादा डिमांड के कारण टिकट की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।

कई रूट्स पर टिकट मिलना मुश्किल

ट्रैवल एजेंटों के मुताबिक, अगले कुछ दिनों के लिए कई फ्लाइट्स लगभग फुल हो चुकी हैं। दिल्ली, मुंबई, कोच्चि, हैदराबाद और चेन्नई जैसे बड़े शहरों के लिए टिकट मिलना मुश्किल हो गया है।

कुछ यात्रियों ने बताया कि सामान्य दिनों में जो टिकट 20 से 30 हजार रुपए में मिल जाती थी, वही अब कई गुना महंगी हो गई है। कई मामलों में यात्रियों को एक लाख रुपए से ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है।

एयरलाइंस ने बदले उड़ान मार्ग

सुरक्षा कारणों से कई एयरलाइंस ने अपने फ्लाइट रूट बदल दिए हैं। इससे उड़ान की दूरी और समय दोनों बढ़ गए हैं। लंबा रास्ता लेने की वजह से ईंधन खर्च भी बढ़ रहा है, जिससे टिकट की कीमतें बढ़ना स्वाभाविक माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक क्षेत्र में हालात सामान्य नहीं होते, तब तक फ्लाइट किराए में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

यात्रियों को सलाह

ट्रैवल विशेषज्ञ यात्रियों को सलाह दे रहे हैं कि अगर उन्हें जल्द यात्रा करनी है तो टिकट पहले से बुक कर लें। इसके अलावा अलग-अलग एयरलाइंस और रूट्स की तुलना करके टिकट खरीदना बेहतर रहेगा।

यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है तो आने वाले दिनों में हवाई यात्रा और महंगी हो सकती है।

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दावा: ट्रम्प ईरान के खार्ग आइलैंड पर कब्जा चाहते हैं, एक्सपर्ट बोले– हमला हुआ तो विश्वयुद्ध का खतरा

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मध्य -पूर्व में बढ़ते राजनितिक और सैन्य तनाव के बिच अब एक नया दवा चर्चा में है। कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण खार्ग आइलैंड (Kharg Island) पर नियंत्रण चाहते हैं। यह वही द्वीप है जहां से ईरान के लगभग 90% कच्चे तेल का निर्यात होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस क्षेत्र को लेकर किसी तरह की सैन्य कार्रवाई होती है तो इससे पूरे मध्य-पूर्व में बड़ा संघर्ष भड़क सकता है। कुछ विश्लेषकों ने तो यहां तक कहा है कि ऐसी स्थिति विश्वयुद्ध जैसे हालात भी पैदा कर सकती है।

खार्ग आइलैंड क्यों है इतना महत्वपूर्ण

खार्ग आइलैंड फारस की खाड़ी में स्थित एक छोटा लेकिन बेहद महत्वपूर्ण द्वीप है। ईरान के तेल निर्यात का बड़ा हिस्सा इसी द्वीप के टर्मिनल से दुनिया के अलग-अलग देशों तक पहुंचता है।

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार यदि इस द्वीप पर हमला होता है या इसका संचालन बाधित होता है तो वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच सकती है। इससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं और कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ने की आशंका

मध्य-पूर्व पहले से ही कई राजनीतिक और सैन्य तनावों का केंद्र रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसे में खार्ग आइलैंड जैसे रणनीतिक क्षेत्र को लेकर कोई भी सैन्य कदम हालात को और गंभीर बना सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इस क्षेत्र में हमला होता है तो केवल ईरान और अमेरिका ही नहीं, बल्कि अन्य बड़े देश भी इसमें शामिल हो सकते हैं। इससे क्षेत्रीय संघर्ष तेजी से वैश्विक स्तर तक फैल सकता है।

तेल सप्लाई पर पड़ सकता है असर

खार्ग आइलैंड पर किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई का सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई पर पड़ सकता है। दुनिया के कई देश ऊर्जा जरूरतों के लिए मध्य-पूर्व पर निर्भर हैं। ऐसे में यदि तेल निर्यात बाधित होता है तो ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है।

विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल सकता है। इससे परिवहन, उद्योग और आम लोगों की दैनिक जरूरतों पर भी असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों ने चेतावनी दी है कि इस तरह की रणनीतिक जगहों को लेकर सैन्य टकराव से बचना बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि कूटनीतिक बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान ही इस तरह के विवादों को सुलझाने का बेहतर तरीका है।

यदि बड़े देशों के बीच तनाव बढ़ता है तो इसका असर केवल मध्य-पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति पर पड़ सकता है।

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Yashwant Sahani

By Yashwant Sahani

मैं CG Khabri Network में न्यूज एडिटर हूँ और ताज़ा खबरों, सामाजिक मुद्दों और क्षेत्रीय घटनाओं पर लेख लिखता हूँ।

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