Table of Contents Toggle गुरु नानक की पावन धरती गढ़फुलझर में बनेगा छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा गुरुद्वारा गढ़फुलझर में बनेगा छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा गुरुद्वारा ऐतिहासिक पृष्ठभूमिकैसे पहुंचे थे गुरु नानक देव जी गढ़फुलझर गढ़फुलझर में बनेगा छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा गुरुद्वारा ऐतिहासिक और धार्मिक महत्वभव्य गुरुद्वारा बनाने की तैयारीधार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावाक्षेत्र के विकास की उम्मीद गुरु नानक की पावन धरती गढ़फुलझर में बनेगा छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा गुरुद्वारा बसना (महासमुंद)।महासमुंद जिले के बसना क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक गांव गढ़फुलझर अब एक बड़ी धार्मिक पहचान की ओर बढ़ रहा है। यहां जल्द ही छत्तीसगढ़ का सबसे विशाल गुरुद्वारा बनने की योजना तैयार की जा रही है। यह स्थान सिख धर्म के लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि मान्यता है कि सिखों के प्रथम गुरु, गुरु नानक देव जी अपनी यात्रा के दौरान इस क्षेत्र में पहुंचे थे और यहां कुछ समय बिताया था। इसी वजह से यह जगह लंबे समय से श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई है। 🛕 गढ़फुलझर में बनेगा छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा गुरुद्वारा https://dainik.bhaskar.com/AJjNIVFAv1b स्थानीय सिख समाज और क्षेत्र के लोगों की पहल से अब यहां एक भव्य गुरुद्वारा निर्माण की योजना बनाई गई है। प्रस्तावित गुरुद्वारा परिसर को काफी बड़े क्षेत्र में विकसित किया जाएगा, जिससे यह छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा गुरुद्वारा बन सके। इसके निर्माण से न केवल धार्मिक महत्व बढ़ेगा बल्कि पूरे क्षेत्र में पर्यटन और विकास को भी नई दिशा मिल सकती है। गढ़फुलझर में बनेगा छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा गुरुद्वारा ऐतिहासिक पृष्ठभूमि गढ़फुलझर गांव को ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार करीब पांच सौ साल पहले गुरु नानक देव जी अपनी आध्यात्मिक यात्राओं के दौरान इस क्षेत्र में आए थे। उस समय वे अमरकंटक से आगे की यात्रा पर थे और रास्ते में गढ़फुलझर में ठहरे थे। बताया जाता है कि यहां उन्होंने लोगों को सत्य, सेवा और मानवता का संदेश दिया था। इस ऐतिहासिक घटना के कारण गढ़फुलझर धीरे-धीरे सिख श्रद्धालुओं के लिए एक पवित्र स्थल के रूप में प्रसिद्ध हो गया। हर साल यहां दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और गुरु नानक देव जी से जुड़ी इस पावन भूमि के दर्शन करते हैं। कैसे पहुंचे थे गुरु नानक देव जी गढ़फुलझर इतिहास और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार गुरु नानक देव जी 15वीं–16वीं शताब्दी में अपनी प्रसिद्ध उदासियों (धार्मिक यात्राओं) के दौरान भारत के कई हिस्सों में गए थे। इन्हीं यात्राओं में से एक यात्रा के दौरान वे अमरकंटक से होते हुए ओडिशा के जगन्नाथ पुरी की ओर जा रहे थे। इसी मार्ग में उन्होंने छत्तीसगढ़ के कई क्षेत्रों का भ्रमण किया। बताया जाता है कि जब गुरु नानक देव जी इस क्षेत्र से गुजर रहे थे, तब वे बसना के पास स्थित गढ़फुलझर गांव में पहुंचे और यहां दो दिन तक रुके। उस समय यहां के स्थानीय लोगों और शासकों ने उनका स्वागत किया। गुरु नानक देव जी ने यहां लोगों को सत्य, समानता, सेवा और मानवता का संदेश दिया। कहा जाता है कि उनकी वाणी और शिक्षाओं से प्रभावित होकर यहां के कई लोग उनके अनुयायी बन गए। इसी वजह से गढ़फुलझर को सिख समाज के लिए एक पवित्र स्थान माना जाता है। गढ़फुलझर में बनेगा छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा गुरुद्वारा ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व गढ़फुलझर को आज भी गुरु नानक देव जी के आगमन से जुड़ी कई मान्यताओं के लिए जाना जाता है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यहां गुरु नानक देव जी ने लोगों को भक्ति और सेवा का मार्ग बताया था। समय के साथ यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बन गया। हर साल गुरु नानक जयंती और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं और इस पावन स्थल पर मत्था टेकते हैं। भव्य गुरुद्वारा बनाने की तैयारी अब सिख समाज और स्थानीय प्रशासन के सहयोग से यहां एक विशाल गुरुद्वारा परिसर बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है। गुरुद्वारा निर्माण के लिए भूमि पूजन कार्यक्रम भी प्रस्तावित किया गया है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। इस अवसर पर धार्मिक कार्यक्रमों के साथ कीर्तन और लंगर का आयोजन भी किया जाएगा। योजना के अनुसार गुरुद्वारा परिसर में कई सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इनमें बड़ा दीवान हॉल, श्रद्धालुओं के लिए धर्मशाला, लंगर हॉल और अन्य आवश्यक सुविधाएं शामिल हो सकती हैं। इससे यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्था मिल सकेगी। धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा गढ़फुलझर में इतने बड़े गुरुद्वारा का निर्माण होने से यह स्थान भविष्य में धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। छत्तीसगढ़ के अलावा पंजाब, मध्यप्रदेश, ओडिशा और अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आ सकते हैं। पर्यटन बढ़ने से स्थानीय लोगों को भी आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है। होटल, दुकानें और अन्य छोटे व्यवसायों को बढ़ावा मिलेगा जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मजबूत हो सकती है। क्षेत्र के विकास की उम्मीद स्थानीय लोगों का मानना है कि गुरुद्वारा बनने से गढ़फुलझर और बसना क्षेत्र की पहचान पूरे देश में बनेगी। इससे सड़क, परिवहन और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विकास भी तेजी से हो सकता है। गांव के कई लोगों का कहना है कि यह परियोजना सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास का एक बड़ा अवसर है। आने वाले समय में यह स्थान छत्तीसगढ़ के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हो सकता है। read more … बसना में पैथोलॉजी लैब में अनियमितता, तकनीशियन के भरोसे चल रही थीं जांच सोने की कीमत में फिर गिरावट: निवेशकों खरीदारी का अच्छा मौका tags .. #basna #cgkhabri #news #khabr #samchar #cg khabr Post navigation बसना में पैथोलॉजी लैब में अनियमितता, तकनीशियन के भरोसे चल रही थीं जांच 13 march मौसम ने बदला रुख: 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